मैं पैसों का क्या करूँगा ? (फाइनेंसियल प्लानिंग in hindi)

मुझे अकसर ऐसे लोग मिल जाते हैं जो अपने आप से ये सवाल पूंछते है ,

“ मैं इन पैसों का क्या करूँगा” 

“जो मैं कमा रहा हूँ , क्या मैं अपने साथ ले जाऊंगा”

और फिर ये कहने के बाद अपनी ज़िन्दगी में उसी तरह लग जाते हैं जिस तरह लगे हुए थे |  पैसों के पीछे परेशान और बेहाल|  उनको ये तो महसूस हुआ कि कहीं ना कहीं उनकी जरूरतें सीमित हैं मगर फिर भी वो अपने आपको ये नहीं समझा पाते कि बस अब हो गया|  लगे रहते हैं पैसों के पीछे हाय तोबा करते| 

कुछ लोगों को मैंने पाया है कि वो अपने आपको insecure महसूस करते हैं|  उन्हें लगता है कि आज to बढ़िया चल रहा है मगर क्या पता कल हो ना हो ! इसलिए लगे रहते हैं पैसे बटोरने में| 

तो ऐसा क्यूँ होता है ?

ऐसा क्या है जो हमें रात दिन परेशान करता है ? क्या आपने कभी अपने इस सवाल को गेहराई से समझा-परखा|  मैं भी पहले सोचा करता था कि अगर मेरी नैउकरी चली गई to मैं कैसे अपनी और अपने परिवार की ज़िन्दगी चलाऊंगा? मुझे भी insecurity की feelings आती रहती है| 

 तो हम इस insecure feelings से कैसे अपने को आज़ाद करें?  क्या कोंई उपाय है ?

जी हां |  उपाय है | 

इसका उपाय ये है कि हम आपने पैसों की प्लानिंग यानि financial planning करें| 

तो क्या है ये financial planning और कैसे की जाती है| 

financial planning का मतलब है कि आपको अपने पैसों से क्या करना है इसका पूरा विस्तृत प्लान |  आपके प्लान में ये आपको पता रहता है कि आपके पास पैसा कहाँ से आएगा और कहाँ जायेगा|  आपको पता रहेगा कि आप के फाइनेंसियल goals या यूँ कहें कि आपके वो प्लान जो आप अपने लिए और अपने परिवार के लिए करते हैं उनको कब तक में और कैसे पूरा कर लेंगे?

आपका प्लान एक written document(लिखित दस्तावेज़) होता है|  ये आपको नक़्शे की तरह गाइड करता है कि आपके जीवन के अलग-अलग पड़ाव में आप कैसे आगे बढ़ेंगे| 

चलिए थोडा इस प्लानिंग को खुलकर समझते हैं |  मान लीजिये आपके 2 बच्चे हैं और अभी वो छोटे हैं| आपके बच्चे 6 और 2 साल के हैं| आप अभी 35 साल के हो गए हैं|  आप किसी दफ्तर में नौकरी करते हैं और आपकी retirement की age है 60 साल|  आप दोनों कमाते हैं|  क्या आप बता सकते हैं आपके आने वाले समय में आपको किस-किस तरह के खर्चों के लिए तैयार रहना होगा ?

  1. आपके बच्चों की एजुकेशन
  2. आपकी retirement
  3. आपके पास शायद अपना घर ना हो मगर आप जरूर चाहोगे कि आपके पास आपका खुद का घर हो

ये कुछ ऐसे खर्चे हैं जिसके लिए आपकी एक महीने, एक साल की सैलरी से पूरा होना ना संभव नहीं है|  क्यूंकि ये खर्चे बड़े हैं, आपको काफी सारा पैसा इक्कठा करना होगा|  और उतना पैसा इक्कठा करने के लिए एक प्लान तैयार करना होगा|  इसी प्लान की मैं बात कर रहा हूँ आपसे |  

एक अच्चा plan आपको बताता है कि आपको किस तरह अपने financial goals तक पहुँच पाएंगे|  इतना ही नहीं ये आपके खर्चों को भी नियंत्रित करने में कारगर सिद्ध होगा|  ऐसा आप इसलिए कर पाएंगे क्यूंकि आपको तब पता होगा कि आपको कितना पैसा इक्कठा करने के लिए हर महीने, हर साल कितना बचाना है और कहाँ लगाना है|

financial planning(फिन प्लान) के कई पहलू हैं|

  1. सेविंग्स प्लान
  2. निवेश का प्लान
  3. बीमा का प्लान
  4. इनकम टैक्स का प्लान
  5. बजट

financial प्लानिंग को मैं अब आगे फिन प्लान और फिन प्लानिंग से रेफर करूँगा| 

आपकी फिन प्लानिंग अच्छी होगी to आपको insecurity की feelings ख़त्म हो जाएँगी|  हम जीवन में किसी भी पड़ाव में हों फिन प्लानिंग से हम अपनी life बेहतर और मस्त बना सकते हैं| 

हर व्यक्ति को अपनी फिन प्लानिंग करनी चाहिए|  जितनी जल्दी आप इसे शुरू करेंगे उतनी ज्यादा अच्छी आपकी फिन प्लानिंग हो पायेगी| 

तब आप अपने आपको सचमुच आज़ाद महसूस कर पाएंगे – चिंताओं से|   

Amended Motor Vehicles Act and TPA

नया Motor Vehicles Act आ गया है |  इसे देश के अधिकाँश राज्यों में implement भी किया जा चुका है|  इस amended Motor Vehicles Act में कुछ ऐसी बातें जुडी हैं जो Insurance से जुड़ी है|  आइये उनके बारे में जाने:

बिना Insurance के वाहन को चलाने पर क्या आपको पता है कि आपको जुरमाना और जेल की सजा, दोनों हो सकती है|  शायद हमें ये नियम नहीं पता है इसलिए हम बिना insurance के गाडी चलाते हैं| 

अब नए Motor Vehicle Act के अनुसार यदि आपके पास गाड़ी का insurance नहीं होगा तो आपको 4000 रुपये जुरमाना और 3 महीने तक की जेल में सजा हो सकती है|  इसलिए मैं आप सबसे ये अपील करूँगा कि बिना Insurance के गाडी ना चलायें| 

दूसरी सबसे जरूरी बात जो आपको मैं इस blogpost में बताना चाहूँगा वो ये है कि आप इस बात पर जरूर ध्यान दें कि third party liability insurance आपने जरूर कराया हो|  कई बार हम Third Party Liability Insurance नहीं कराते और बुरे फंस जाते हैं|  ऐसा हम अक्सर इसलिए करते हैं क्यूंकि हम कम से कम रकम में अपना insurance करवा लेना चाहते हैं| 

अब नए ACT में TPA यानि third party liability insurance compulsory है| 

TPA क्या है?

मान लीजिये आपके पास कार है और आप अपनी कार में ड्राइव कर रहे हैं|  अचानक किसी दिन आपकी कार का Accident होता हैं|  और उस accident में आपकी कार से टकराकर किसी व्यक्ति को या उसकी गाड़ी को नुक्सान पहुँचता हैं|  ऐसी स्थिति में वो व्यक्ति आपके खिलाफ court में case दायर करके आपसे compensation की मांग कर सकता है|  और आपकी उस सूरत में भारी नुक्सान उठाना पड़ सकता हैं क्यूंकि compensation claim लाखों में होता है|  इसलिए आपको चाहिए कि आप अपनी car या 2 wheeler के insurance में TPA clause जरूर जुडवाएं|    

Savings कैसे करें ?? ( How to Save in Hindi )

आप कुछ भी कहो लेकिन जब तक आपके money matters में आप peaceful नहीं हैं तब तक आपको ज़िन्दगी में complete peace of mind मिलना possible नहीं है|  हम जिस दुनिया में रहते हैं उस दुनिया में रहने के लिए हमें बहुत सारी चीज़ों की जरूरत पड़ती है|  इन जरूरतों को जिसके लिए आप दूसरों पर dependent हैं|  ये जरूरतें हमारी salary के बढ़ने के साथ बढ़ जाती हैं|  हम हमेशा यही सोचते हैं कि, “ काश! मेरी salary थोड़ी और बढ़ जाती तो मैं कुछ savings कर लेता|  मैं कुछ पैसे mutual funds में लगा देता|  और कुछ पैसे PPF में भी जमा करा देता| 

मगर ऐसा हो नहीं पाता|  जैसे ही salary बढती है, उसी के साथ हमारी जरूरतें और भी बढ़ जाती हैं|  आपने भी ऐसा ही अपनी ज़िन्दगी में महसूस किया होगा|  तो क्या आपने कभी ये समझने की कोशिश की? शायद नहीं!!

तो चलिए आज हम इस blog post में इसी बात पर चर्चा करेंगे कि ऐसा क्यूँ होता हैं और किस तरह इस mentality से बाहर निकला जाये | मैं आपको अपनी ही कहानी बताता हूँ|  आज से तकरीबन 9 साल पहले मैंने अपनी last job से resign किया था|  वो मेरी first proper job थी|  उसके पहले मैंने कहीं एक साल, तो कहीं 6 महीने काम किये थे|  जब मैंने 9 साल पहले job से resign किया to मुझे आश्चर्य हुआ कि मेरे पास खुद की कोंई भी savings नहीं थी|  It was the shock of my life! 

जब मैंने पिछले job से resign किया था तब मेरे पास Savings के नाम पर EPF की Savings थीं|  EPF यानि Employees Provident Fund| इस fund में मेरे पास जो भी पैसे इक्कठे हुए थे वो मेरी salary से जो हर महीने कटता था उसी से ये fund इक्कठा हो गया था|  उसके अलावा मुझे Gratuity के रूप में 3 महीने की salary मिली थी|  बस इसके सिवा मेरे पास कुछ भी savings नहीं थी| मुझे अपने आप पर विश्वास नहीं हो रहा था कि मैंने पिछले आठ सालों में कुछ भी savings नहीं की|  ये कैसे हो सकता है ? 

मगर Reality मेरे सामने थी|  मैं चाहूँ मानू या ना मानूं|  Self-Denial सिर्फ अपने को मूर्ख बनाने के सिवा और कुछ नहीं है|  इसलिए मैंने अपनी इस बात पर गौर किया|  मेरी wife मुझे लगातार कुछ भी Savings ना करने के लिए taunt कस रही थी|  मगर मैं कुछ भी जवाब नहीं दे पा रहा था| 

मुझे मेरी present job में 9 साल हो रहे हैं और मैं आपको बहुत ही गर्व के साथ बताना चाहता हूँ कि मैंने जो गलतियाँ की थी उन पर विजय प्राप्त कर ली है|  मैंने पिछले 9 सालों में:

  1. PPF account में respectable amount जमा कर लिया है|  मेरा PPF account 9 साल पुराना होने चला है|
  2. मैंने अपनी Retirement के लिए NPS scheme में अच्छी-खासी रकम जमा कर ली है जो मेरी दो साल की annual income के बराबर होगी| 
  3. मेरी 2 SIP भी चल रही हैं पिछले 5 सालों से|
  4. मेरे EPF में भी मैं हर महीने Contribute कर रहा हूँ| 

तो ये सब कैसे हुआ ?

मैं भी कभी यही सोचता था कि काश मेरी salary थोड़ी और ज्यादा होती तो मैं savings कर पाता|  दरअसल बात ये है कि ऐसा कभी नहीं हो पायेगा |  आप जितना भी कमाएंगे आपको और पैसों की कमी खलेगी|  क्यूंकि हम जिस तरह कि mentality में जीते हैं वहां हमें सिर्फ खर्च करना सिखाया जाता है|  savings करना नहीं| 

मैंने पिछले 9 सालों में सिर्फ एक principle बनाया है जिसने मुझे financial peace of mind दिया|

और वो principle है:

Automate your Savings: 

आप जितना भी save करना चाहो’ use अपनी मर्जी पे ना छोड़ कर, Automatic कर दीजिये|  मैंने जब last job से resign किया तो मैंने पाया कि मैंने जो भी Savings के रूप में जुटाया थावो इसलिए possible हुआ क्यूंकि मैं उन पैसों को अपने तक आने से पहले ही कटवा लेता था|  जैसे आपकी salary में आपको कुछ deductions देखने को मिलता होगा|  ये deduction automated होता है|  आपको सोचने की जरुरत नहीं पड़ती कि आप कटाव कि नहीं |  आपको सोचने की जरुरत नहीं पड़ती कि आपके पास कितने expenses हैं|  आपको जो भी account में मिलेगा वो automated deductions के बाद ही मिलेगा| 

बस, जिस दिन ये बात समझ में आई मैंने सबसे पहले अपना Voluntary PF Contribution बढ़ा दिया|  अब तक जो मैं 12% कटवा रहा था उसको बढ़ाकर मैंने 25% करवा दिया|  Result ये हुआ कि अपने आप savings होनी शुरू हो गईं |  जब जब मुझे salary increment मिलता मेरी savings भी उसी proportion में बढती रही हैं| 

Secondly, मैंने PPF यानि Public Provident Fund Account खुलवाया और उसमे भी Standing Instructions set करवा दिया|  Standing Instruction या SI automated deductons होते हैं जो महीने की पहले से निश्चित तारिख को पैसे काट लेता है| 

इसी तरह मैंने जब Mutual Funds की दुनिया को समझना शुरू किया, to उसमें भी invest करना शुरू कर दिया|  SIP यानि Systematic Investment Plan जिसमें हर महीने Mutual Fund Co अपने आप pre-decided date को पैसे आपके Savings Bank Account से काटकर aapke Mutual Fund Scheme में जमा कर देती है| 

इसी तरह NPS में भी मैं regular Savings park करते आ रहा हूँ| 

देखिये, यदि आप Savings को अपनी जरूरतों के हिसाब से decide करेंगे to कभी भी savings नहीं हो पायेगी|  आप Savings पहले करिए और जो बचता है उसके हिसाब से अपना Expenditure प्लान बनाएं|  ऐसा करने से आप चाहे जितनी भी कम salary हो, कुछ ना कुछ पैसे बचा ही लेंगे| 

बस कुछ बातें ध्यान रहे:

  • Savings हर महीने करें
  • Savings का बजट ऐसा हो कि use Savings प्लान से निकालकर use ना करें
  • कम savings करें मगर regular करें

अब मैं आपसे जानना चाहूंगा कि आपने अपनी Savings start कैसे की | नीचे comments में जरूर बताएं |

NEFT/RTGS कैसे किया जाता है ? (How to do NEFT/RTGS in Hindi)

जब आपएक बैंक से दुसरे बैंक में money transfer करना चाहें, तब आप NEFT/RTGS सेकर सकते हैं|  आइये जानें, NEFT और RTGS क्या है?

NEFT का फुल form है: National Electronic Fund Transfer.  मान लीजिये कि आपका बैंक account bank A में है और आपको किसी वजह Bank B के account में money transfer करने हैं|  इसके लिए आप अपने बैंक में जायें|  वहां पर आपको एक NEFT का form मिलेगा|  आपको ये form भरके जमा करना होगा|  अपने बैंक account से पैसे कटवाने के लिए एक Cheque भी काटना होगा| 

NEFT form कैसे भरें:

आपको NEFT का form भरने के लिए Bank B यानि Benefificary की details पता होनी चाहिए:

  1. Account No
  2. Bank Name
  3. IFSC Code
  4. Bank Branch address

आपका NEFT form कुछ इस तरह से दिखेगा :

RTGS का फुल form है: Real Time Gross Settlement: ये भी NEFT की तरह ही किया जाता है|  इसमें आप 2 लाख रुपये से ज्यादा के लिए use कर सकते हैं|  जब आप RTGS करते हैं to money transferतुरंत होता है| इसलिए इसे REAL TIME कहा जाता हैं| 

RTGS/NEFT की कोंई upper limit नहीं है|   

NEFT/RTGS करने की timings:

आप NEFT/RTGS सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच कभी भी कर सकते हैं| weekends जैसे 2nd aur 4th Saturday, Sundays और bank holidays में ये सेवा उपलब्ध नहीं रहती है| 

तो क्या मैं INTERNET BANKING के जरिये भी NEFT/RTGS कर सकता/सकती हूँ?

जी हाँ, आप INTERNET BANKING के माध्यम से भी NEFT/RTGS का लाभ उठा सकते हैं| 

इसके लिए कुछ चार्जेज भी आपको देने पड़ेंगेजो आप काउंटर पर पूँछ सकते हैं या bank की वेबसाइट से पता लगा सकते हैं|      

आपके debit card पर होता है मुफ्त बीमा,क्या आपको पता है? ( Personal Accident Insurance on your Debit Card in Hindi)

 मैं आपको एक कहानी बताना चाहता हूँ|  कुछ दिनों पहले मेरे पास एक 50 -60 साल की उम्र के सज्जन मुझसे मिलने आए| उनके हाथ में एक फॉर्म था|  मैंने उनको पास बुलाया और पूंछा कि बाबूजी ये किसका फॉर्म लिए हो ? बाबूजी ने उत्तर दिया, “सर जी, मेरे बेटे की दुर्घटना में मृत्यु हो गई है| आपसे पहले जो साहेब थे उन्होंने ये फॉर्म दिया था और बताया था कि इसमें मेरे बेटे को बीमा राशि के रूप में 2 लाख रुपये मिल सकते हैं|  सो मैंने फॉर्म भर लिया है| अब आप कृपा करके मेरे इस फॉर्म को आगे बढ़ा दीजिये ताकि मेरे बेटे के परिवार को कुछ सहारा मिल सके|  

उस सज्जन के पास एक 19 – 20 साल के बीच जैसी दिखने वाली महिला खड़ी थी|  पूंछने पे पता लगा कि वो उसके मृतक बेटे की पत्नी है है| उस महिला की गोद में एक बालक भी था जो शायद अभी कुछ महीनों का ही रहा होगा|  मुझे उसके परिवार की यह दशा देखकर दुःख हुआ| मुझे उस की मदद करने का और उसे पैसे दिलाने का पूरा मन हो गया| मगर अभी तक मैं भी इस बात को नहीं जान रहा था कि debit card insurance का claim कैसे मिलता है|  इसलिए मैंने सज्जन से कहा, “ बाबूजी 2-3 दिन का समय दीजिये| मैं भी इसके बारे में नहीं जानता| मैं आपको पता करके बताता हूँ| आप यह फॉर्म मेरे पास छोड़ जाओ|” बाबूजी को यह सुनकर ख़ुशी हुई और उन्होंने खुश होकर मुझे नमन करते हुए अपना मस्तक झुका लिया|  

बाबूजी 3 दिन बाद मेरे पास आये|  मैंने तब तक उनके कागज पढ़ लिए थे और पूरी जानकारी भी इकट्ठी कर ली थी|  सो मैंने उन्हें बिठाया और बताया, “ आपका debit card RuPay कार्ड है| RuPay कार्ड पर आपको 1लाख तक का बीमा मिलता है| फिर मैंने उनसे कुछ सवाल पूंछे :

  1. क्या आपके पास उस कार्ड की कॉपी है?   इसके लिए आप मुझे ATM कार्ड दिखा सकते हो | 
  2. क्या आपको पता है कि उसकी(बेटे) पासबुक में आखिरी debit card transaction कब हुआ था ?  इसके लिए आप मुझे बैंक अकाउंट पासबुक दिखा सकते हो | 

सज्जन ने पहले तो मना किया लेकिन कुछ सोचकर बोले कि ढूंढ़ता हूँ और फिर आता हूँ |  बहुत दिनों तक सज्जन पुरुष नहीं आये| फिर कुछ 3 हफ़्तों के बाद एक दिन आ ही गए| उनके हाथ में दोनों दस्ता वेज  थे| मैं उनको और उनके हाथ में दस्तावेज देखकर बहुत खुश हुआ| मैंने उनसे कहा, “बैठिये| लाइए देखते हैं कि ये दस्तावेज काम करेंगे !”  देखने पर पता लगा कि debit कार्ड पर पिछले 90 दिनों में कोई transaction नहीं हुआ था| 

ऐसी स्थिति में debit कार्ड insurance claim नहीं स्वीकार होता है|  मुझे बड़े खेद के साथ ये बात बाबूजी को बतानी पड़ी| बाबूजी बहुत गरीब थे और उनके लिए ये बीमा राशि एक स्वप्न के समान थी|  इस राशि से वो अपने बेटे के परिवार को कुछ तो राहत दे ही सकते थे|  

मैंने इस case study के बाद ये महसूस किया कि हमारा नागरिक अपने बैंकिंग के प्रति सजग नहीं है|  मैं बैंकिंग में रहते हुए आज तक नहीं जानता था कि ऐसी भी कोई चीज़ होती है जो बैंक मुफ्त में डेबिट card पर देती है|  दोस्तों मैंने आपको ये कहानी इसलिए बताई कि आप इस कहानी से कुछ सीखकर अपने परिवार के लिए कुछ सोच सकें ताकि आपके साथ ऐसा न हो जैसा उन बाबूजी के साथ हुआ| आपको अपने बैंकिंग सुविधाओं के बारे में जानकारी होनी चाहिए और ये जानकारी अपने परिवारजनों के साथ शेयर भी करनी चाहिए| जानकारी के अभाव में आप अपना हक़ भी खो बैठेंगे|  

तो आइये जानते हैं इस ब्लॉग पोस्ट में, Debit Card Insurance के बारे मे जानते हैं|   

1 .  सबसे पहले आप देखें कि आपके पास कौन सा debit card है |  क्या आपका कार्ड VISA, MasterCard या RuPay कार्ड है ? 

  1. आज इस ब्लॉग पोस्ट को लिखते समय मैंने ये कुछ जानकारी इकठ्ठी की है जो आपको inform करेगी कि आपके कार्ड पर कितने का insurance है? जिस भी बैंक में आपका अकाउंट है उस बैंक का card issuing company के साथ tie-up होता है| इसलिए  आप चाहें तो अपने पसंद का कार्ड request कर सकते हैं| 

ये देखिये मैंने SBI की website से आपके लिए यहाँ कॉपी किया है | please have a look :

Debit Card Variant
Personal Accident Insurance Cover – Non-Air (Death Only) In Rs.
Personal Air Accident Insurance Cover (Death Only)In Rs.
SBI Gold (MasterCard/VISA)2,00,000/-4,00,000/-
SBI Platinum (MasterCard/VISA)5,00,000/-10,00,000/-
SBI Platinum (MasterCard/VISA)5,00,000/-10,00,000/-
SBI Pride (Business Debit) (MasterCard/VISA)2,00,000/-4,00,000/-
SBI Premium (Business Debit) (MasterCard/VISA)5,00,000/-10,00,000/-
SBI VISA Signature Debit Card10,00,000/-20,00,000/-
  1. ध्यान रहे कि आपका Debit कार्ड नियमित रूप से इस्तेमाल में हो| कोई भी debit card पर insurance claim करने के लिए ये बहुत ज़रूरी है| इसलिए इस जानकारी को आप जरूर ध्यान में रखें| जैसे RuPay Classic Debit Card के लिए कम से कम 90 दिनों में एक transaction जरूर करें|  

ये छोटी-छोटी बातें ज़िन्दगी को safe और happy बनाती हैं| जब आपका पैसा आपके लिए सोचेगा तब आपको पैसों की शिकायत न होगी| यदि आपके पास कोई interesting बात या जानकारी हो तो please शेयर करें|